
Su-57 खरीद से AMCA को खतरा? पूर्व IAF चीफ की चेतावनी
Su-57 खरीद से AMCA प्रोजेक्ट को खतरा? पूर्व IAF चीफ ने दी बड़ी चेतावनी
Su-57 Fighter Jet को लेकर भारत में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रूस की ओर से भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर की पेशकश की गई है। रूस ने इसके लिए भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग का विकल्प भी सामने रखा है। हालांकि, पूर्व एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने इस तरह की खरीद को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका मानना है कि अगर भारत ने विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदे, तो इसका सीधा असर देश के स्वदेशी AMCA Project पर पड़ सकता है।
Su-57 को लेकर क्यों मचा है विवाद?
रूस लंबे समय से भारत को इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर की पेशकश करता रहा है। जून 2026 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत के साथ Su-57 के संयुक्त विकास और उत्पादन की इच्छा जाहिर की थी। रूस ने भारत को इस प्रोग्राम में सहयोग और तकनीक साझा करने की पेशकश की है। भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपनी वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करना है। देश का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA प्रोजेक्ट अभी विकास के चरण में है। ऐसे में रूसी फाइटर को अंतरिम विकल्प के तौर पर लेने की चर्चा शुरू हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत करीब दो स्क्वाड्रन यानी लगभग 36 Su-57 विमानों पर विचार कर सकता है। इसका उद्देश्य AMCA के आने तक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की क्षमता को पूरा करना हो सकता है। हालांकि, यह खरीद अभी अंतिम फैसला नहीं है।
पूर्व IAF चीफ ने क्यों दी चेतावनी?
- भदौरिया ने Su-57 के बजाय AMCA को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
- उन्होंने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर पर फोकस करने की बात कही।
- उनका तर्क है कि शुरुआत में सीमित खरीद बाद में बड़े बेड़े की खरीद में बदल सकती है।
- विदेशी फाइटर खरीदने से पैसा, विशेषज्ञता और संसाधन AMCA से दूर हो सकते हैं।
- इन संसाधनों को AMCA में लगाने से भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर विकसित कर सकता है।
AMCA के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
AMCA Project भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रमों में से एक है। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर विकसित करना है। ऐसे में विदेशी स्टील्थ फाइटर की बड़ी संख्या में खरीद से AMCA की जरूरत और उत्पादन प्राथमिकता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत पहले रूस के साथ FGFA कार्यक्रम में भी शामिल था, जो पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की संयुक्त परियोजना थी। लेकिन भारत ने बाद में इस कार्यक्रम से दूरी बना ली थी। उस समय स्टील्थ, एवियोनिक्स, रडार और सेंसर जैसी क्षमताओं को लेकर भी भारतीय पक्ष की चिंताएं सामने आई थीं।
क्या भारत को Su-57 खरीदना चाहिए?
- यह फैसला भारत की लंबी अवधि की रक्षा रणनीति से जुड़ा है।
- इससे AMCA से पहले पांचवीं पीढ़ी की क्षमता मिल सकती है।
- बड़ी विदेशी खरीद से AMCA के संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है।
- भारत के सामने तत्काल जरूरत और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन की चुनौती है।
नोट: इस फाइटर की संभावित खरीद और इससे जुड़े विकल्पों पर अंतिम सरकारी फैसला अलग विषय है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित विकल्प के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि पक्की डील के तौर पर।
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