
BRICS Summit: Goodie Bag में क्या है? सत्तू-मखाना ने चौंकाया
BRICS Summit: विदेशी मेहमानों को मिलेगा खास Goodie Bag, सत्तू से लेकर कॉफी तक भारतीय स्वाद की झलक
नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेता, अधिकारी और पत्रकार भारत पहुंच रहे हैं। इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत सिर्फ कूटनीति और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी संस्कृति, खान-पान और स्थानीय उत्पादों की झलक भी दुनिया के सामने पेश कर रहा है।
BRICS Summit के Goodie Bag में क्या खास है?
भारत ने इस बार Goodie Bag को सिर्फ औपचारिक उपहार तक सीमित नहीं रखा है। इसमें ऐसे उत्पादों को जगह दी गई है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों की पहचान और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस खास पैकेज में बिहार का सत्तू, मखाना और ओडिशा की कोरापुट कॉफी जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के जरिए भारत के अलग-अलग राज्यों की खाद्य परंपरा और स्थानीय उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
बिहार का सत्तू और मखाना बना आकर्षण
Goodie Bag में बिहार के लोकप्रिय उत्पादों को शामिल करना खास तौर पर दिलचस्प है। सत्तू लंबे समय से बिहार और उत्तर भारत के खान-पान का अहम हिस्सा रहा है। वहीं मखाना भी देश के प्रमुख पारंपरिक खाद्य उत्पादों में शामिल है। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए इन उत्पादों को शामिल करने का मतलब सिर्फ भारतीय खाना पेश करना नहीं है, बल्कि उन स्थानीय उत्पादों की पहचान को भी सामने लाना है, जिनसे लाखों किसानों और छोटे कारोबारियों की आजीविका जुड़ी हुई है।
BRICS Summit में ओडिशा की कोरापुट कॉफी की भी झलक
Goodie Bag में Koraput Coffee को भी जगह दी गई है। ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र की कॉफी देश की अलग-अलग स्थानीय उपज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की कोशिश का उदाहरण है। BRICS Summit जैसे बड़े आयोजन में इसका शामिल होना स्थानीय उत्पादों को वैश्विक दर्शकों के सामने रखने का एक अवसर माना जा सकता है।
भारतीय संस्कृति को दिखाने की कोशिश
- इस बार भारत की मेजबानी में BRICS Summit में संस्कृति और विरासत को भी खास महत्व दिया जा रहा है।
- भारत मंडपम में अलग-अलग देशों की संस्कृति और विरासत प्रदर्शित की जा रही है।
- रूस की ओर से भी पारंपरिक कला और सांस्कृतिक वस्तुओं को展示 किया जा रहा है।
- दिल्ली के प्रमुख होटलों में विदेशी मेहमानों के लिए भारतीय व्यंजन और पारंपरिक स्वागत की विशेष व्यवस्था है।
- अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय स्वाद भी आयोजन का हिस्सा बनाए गए हैं।
Goodie Bag के पीछे ‘Vocal for Local’ की सोच
इस पहल को Vocal for Local की सोच से भी जोड़कर देखा जा सकता है। जब किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में स्थानीय उत्पादों को विदेशी प्रतिनिधियों के सामने पेश किया जाता है, तो इससे छोटे उत्पादकों, कारीगरों और स्थानीय ब्रांडों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने का रास्ता खुल सकता है। भारत में अलग-अलग राज्यों की अपनी विशेष खाद्य और हस्तशिल्प परंपराएं हैं। ऐसे में BRICS Summit जैसे वैश्विक मंच पर इन उत्पादों को पेश करना भारत की विविधता को दिखाने का प्रभावी तरीका बन सकता है।
BRICS Summit में दुनिया के सामने दिखेगी भारत की विविधता
18वें BRICS Summit में भारत की कोशिश सिर्फ वैश्विक नेताओं की बैठक आयोजित करने तक सीमित नहीं है। सम्मेलन के जरिए भारत अपनी संस्कृति, स्थानीय उत्पादों, खान-पान और परंपराओं को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कर रहा है। Goodie Bag में शामिल सत्तू, मखाना और कोरापुट कॉफी जैसे उत्पाद यह दिखाते हैं कि भारत की पहचान केवल बड़े शहरों और बड़े ब्रांडों तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में तैयार होने वाले स्थानीय उत्पाद भी भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
- नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit कूटनीतिक चर्चाओं के लिए चर्चा में है।
- Summit में भारतीय संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की भी खास झलक देखने को मिलेगी।
- विदेशी प्रतिनिधियों और पत्रकारों को खास Goodie Bag दिए जाएंगे।
- इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के स्थानीय और खास उत्पाद शामिल हैं।
- बिहार का सत्तू और मखाना तथा ओडिशा की कोरापुट कॉफी इसमें भारतीय स्थानीय स्वाद की झलक दिखाते हैं।
- ऐसे प्रयासों से भारत के स्थानीय उत्पादों और छोटे उत्पादकों को वैश्विक पहचान मिलने में मदद मिल सकती है।

